Wednesday, 10 August 2016

किस्से-कहानियां

                                        किस्से-कहानियां



                                                        वो किस्से वो कहानियां
                                                      तमाम अफ़साने तमाम बातें
                                                       याद जब - जब भी आती है 
                                                        भूल जाता हूँ खुद ही को
                                                       पा लेता हूँ , खुद ही मे तुमको  
                                                                       Anuj Pareek

                       

                                   WordOrb (My WORD Is My WORLD)


                                                               

                                                                     

Wednesday, 13 July 2016

गरीबी-अनुज पारीक

गरीबी हाथ से रिश्तो का दामन छीन लेती है ,पिता की मौत भी बच्चो से बचपन छीन लेती है .गरीबी खुशियां छीन लेती है! जरुरत और मजबूरियां आदमी से घर आँगन छीन लेती है हालातो में फसे आदमी से तो अपने भी मुॅह मोड़ लेते है ,गरीबी हाथ से रिश्तों का दामन छीन लेती है !! (अनुज पारीक)

कितना अच्छा लगता है

कुछ न करते हुए बैठे रहना घंटो तक सुनना सिर्फ़ उस हसी को कितना अच्छा लगता है .भूल जाना हर एक परेशानी को खुद ही में खोकर तुझे पा लेना कितना अच्छा लगता है. खोकर कही नए तराने बुनता हूँ नए सुर में गुन गुनाना अच्छा लगता है .ANUJPAREEK

‪#‎A‬ ‪#‎College‬ ‪#‎Going‬ ‪#‎Student‬ -‪#‎ANUJPAREEK‬

‪#‎A‬ ‪#‎College‬ ‪#‎Going‬ ‪#‎Student‬ -‪#‎ANUJPAREEK‬

कभी कभी एक ख्याल जो दिल में आता है चेन-ओ -सुकून सब चला जाता है
सोचता हूँ कभी जो उस दायरे में तो लगता है जैसे सिर पर बाल ही ना हो
और अगर किसी college going student के कोई gf ना हो तो जैसे सिर पर बाल ना हो
मेरी कहानी भी कुछ ऐसी ही थी और मुझे भी कई बार ऐसा ही लगता था
लेकिन जब जब भी सोचता हूँ उस दायरे में तो एक फ़र्ज़ हूँ मैं !घर से मीलो-दूर आया हूँ . कुछ करना है नाम कमाना है पैसा कमाना है .पर अपने दोस्तों को देख कर कर कभी कभी लगता था की Bike राइडिंग , किसी मॉल के बाहर घंटो खडे रहना, आँखे सेकना,धुँआ के साथ चाय की थडियों पे गप-शप करना शायद यही वक़्त बिताने का एक तरीका होता है .किसी कॉलेज स्टूडेंट के लिए और मुझे भी लगता की अब तो Gel लगानी चाहिए .. और लगता भी क्यों ना आखिर मैं भी तो एक कॉलेज गोइंग स्टूडेंट था ..लेकिन मैं जिसे वक़्त बिताना समझ रहा तो वो तो सिर्फ वक़्त ख़राब करना था खेर मैं जान चुका था ये सब time -पास नहीं लक्ष्य से by -pass है !और उसी Time को Utilize कर मेने अपने Field of Interest पर काम करना शुरू किया ..बार-बार हाथ लग रही असफलताओं के बावजूद भी कभी हार नहीं मानी................. बस चलता गया "खुद ही से वायदा किया नहीं रुकना है चलते रहना है जब तक नाम "अनुज " ना हो इस ज़िंदगानी में"आज माता-पिता के आशीर्वाद और परमेश्वर की विषेश कृपा दृष्टि के फलस्वरूप जीवन में बहुत अच्छा कर पा रहा हूँ.......Thank U GOD


Creative Writer Anuj PareekE: anuj_@live.com



Dekho -------------- ek raah

Andhero ke beech se Zindagi ne kaha ki,, Dekho 👉 Ujjas ho raha hai..  
Anuj Pareek

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